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PENDRA टेंडर कांड: सत्यापन में फर्जी निकला अनुभव प्रमाण पत्र, विभाग ने अमानत राशि राजसात की, लेकिन आरोपी ठेकेदार पर अब तक आपराधिक मामला दर्ज नहीं

फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर हथियाने चले थे करोड़ों का टेंडर!

जिला पंचायत भवन टेंडर में कथित फर्जीवाड़ा: दस्तावेज सत्यापन में खुलासा, FIR नहीं होने से विभाग पर उठे सवाल

# करोड़ों की निविदा में कथित फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का मामला

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही।  गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले में जिला पंचायत भवन निर्माण कार्य की करोड़ों रुपये की निविदा प्रक्रिया में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला एक ठेकेदार द्वारा कथित रूप से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर टेंडर हासिल करने के प्रयास से जुड़ा है। सबसे अहम बात यह है कि दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आने के बावजूद अब तक आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की गई है।

## 301 लाख के भवन निर्माण कार्य के लिए जारी हुई थी निविदा

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जानकारी के अनुसार, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) संभाग मरवाही द्वारा जिला पंचायत भवन निर्माण के लिए लगभग 301.32 लाख रुपये की लागत की संक्षिप्त ई-निविदा क्रमांक 08/2025-26 जारी की गई थी।

निविदा की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि इच्छुक ठेकेदार के पास पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कम से कम 2 करोड़ रुपये के किसी एक भवन निर्माण कार्य का अनुभव होना अनिवार्य रहेगा। इसी निविदा प्रक्रिया में मेसर्स हितेश सूर्यवानी, पेण्ड्रा को न्यूनतम दरदाता (L-1) घोषित किया गया था।

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## शिकायत के बाद शुरू हुई दस्तावेजों की जांच

वित्तीय प्रस्ताव खुलने के बाद विभाग को शिकायत और गोपनीय सूचना मिली कि निविदा में प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्र संदिग्ध है। शिकायत मिलने के बाद विभाग ने दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया।

बताया गया कि ठेकेदार द्वारा जिला जांजगीर-चांपा के शिवरीनारायण स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CSC) भवन निर्माण कार्य का अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था। दस्तावेजों के अनुसार यह कार्य लगभग 227.99 लाख रुपये की लागत का बताया गया।

## सत्यापन में सामने आया दूसरा नाम

मामले की गंभीरता को देखते हुए RES विभाग ने CGMSC संभाग बिलासपुर को पत्र भेजकर प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित कार्य का वास्तविक कार्यादेश और पूर्णता प्रमाण पत्र “श्रीजी कन्स्ट्रक्शन” नामक एजेंसी के नाम पर जारी किया गया था, जबकि निविदा में इसे हितेश सूर्यवानी के नाम से प्रस्तुत किया गया था।

इसके बाद दस्तावेजों में कथित कूटरचना और फर्जीवाड़े की आशंका गहरा गई।

## विभाग ने निरस्त की पहली निविदा

मामला उजागर होने के बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से पहली निविदा निरस्त कर दी। साथ ही लगभग 1.51 लाख रुपये की अमानत राशि (FDR) राजसात कर ली गई। इसके बाद विभाग द्वारा पुनः निविदा प्रक्रिया शुरू की गई और नया टेंडर जारी कर कार्य दूसरे ठेकेदार को स्वीकृत कर दिया गया।

## थाना को भेजा गया केवल सूचना पत्र

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित फर्जी दस्तावेज मिलने के बावजूद आरोपी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने में अब तक पहल क्यों नहीं की गई। दस्तावेजों के अनुसार, कार्यपालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग मरवाही द्वारा 02 मार्च 2026 को थाना प्रभारी पेण्ड्रा को पत्र क्रमांक 240/निविदा/ग्रा.या.से./2025-26 भेजा गया।

इस पत्र में मामले की जानकारी देते हुए बताया गया कि सत्यापन के दौरान कार्यादेश एवं पूर्णता प्रमाण पत्र “श्रीजी कन्स्ट्रक्शन” के नाम से पाया गया। इसके बाद निविदा निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई। हालांकि, पत्र में कहीं भी FIR दर्ज करने की स्पष्ट मांग नहीं की गई। पत्र के अंत में केवल “सूचनार्थ सम्प्रेषित” लिखा गया है।

## थाना प्रभारी ने क्या कहा?

इस मामले में थाना प्रभारी पेण्ड्रा का कहना है कि RES विभाग की ओर से केवल सूचना पत्र दिया गया !FIR दर्ज करने के लिए विभाग द्वारा कोई औपचारिक शिकायत या आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी कारण अभी तक मामला दर्ज नहीं किया गया।

विभाग ने उच्च कार्यालय पर डाली जिम्मेदारी

वहीं RES विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) ने कहा कि उच्च कार्यालय से अभी तक FIR दर्ज कराने संबंधी कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, तत्काल कार्रवाई की जाएगी। अब विभाग के इस बयान के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतने गंभीर मामले में भी कार्रवाई केवल “निर्देश” का इंतजार करती रहेगी?

कानूनी कार्रवाई में देरी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति शासकीय निविदा में कथित रूप से फर्जी दस्तावेज और अनुभव प्रमाण पत्र लगाकर करोड़ों रुपये का कार्य हासिल करने का प्रयास करता है, तो यह गंभीर आपराधिक मामला है। ऐसे मामलों में सामान्यतः जालसाजी, धोखाधड़ी, कूटरचना और फर्जी दस्तावेज उपयोग करने जैसी धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाती है।

लेकिन यहां विभाग द्वारा केवल निविदा निरस्त कर औपचारिक कार्रवाई तक खुद को सीमित रखना कई सवाल खड़े कर रहा है।

मिलीभगत की आशंका भी चर्चा में

मामले को लेकर क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि कहीं आरोपी को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यदि विभाग वास्तव में सख्त कार्रवाई चाहता, तो अब तक थाने में नामजद शिकायत देकर FIR दर्ज कराई जा चुकी होती। लोगों का कहना है कि विभागीय सुस्ती और कार्रवाई में देरी से पूरे मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है। अब देखना होगा कि क्या आरोपी ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होता है या यह मामला केवल विभागीय पत्राचार तक ही सीमित रह जाता है।

A Pranav

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